घर का पनीर vs बाजार का पनीर:

By Rachnaa Kumari

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पनीर: वेजिटेरियनों का सबसे भरोसेमंद दोस्त
जिन लोगों के लिए नॉन-वेज ऑप्शन नहीं है, उनके लिए पनीर प्रोटीन का सबसे भरोसेमंद और टेस्टी सोर्स है। चाहे मटर पनीर हो, पनीर टिक्का या फिर शाही पनीर, ये हर रूप में स्वाद का बम फोड़ देता है। पर सवाल यही है कि इस बम को बनाने के लिए सही मटीरियल कहां से लाएं? क्या बाजार का पैक्ड पनीर लें या फिर घर पर ही ताजा पनीर बनाएं? आइए, तुलना करते हैं।

घर का पनीर या मार्केट वाला, हेल्थ के पैमाने पर कौन भारी?
न्यूट्रिशनिस्ट लवनीत बत्रा ने अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट में इस बारे में काफी कुछ समझाया है। उनका कहना है कि पनीर प्रोटीन का पावरहाउस जरूर है, लेकिन हर पनीर एक जैसा नहीं होता। उनकी मानें तो, इस जंग में घर का बना पनीर बाजार वाले पनीर पर भारी पड़ता है। क्यों? चलिए पॉइंट्स में समझते हैं:

शुद्धता पर बाजी: घर का पनीर हाथानी!
बाजार के पैक्ड पनीर में प्रिजर्वेटिव और स्टेबलाइजर्स जैसे अनचाहे मेहमान हो सकते हैं, ताकि वह महीनों तक फ्रेश (दिखे)। वहीं, घर का पनीर बिल्कुल सादा और नटखट होता है – बस फुल क्रीम दूध और नींबू या सिरके जैसे नेचुरल कोआगुलंट्स से बनता है। कोई मिलावट नहीं, कोई छल-कपट नहीं।

नमक की मात्रा: यहां घर का पनीर जीतता है!
पैक्ड पनीर को लंबे समय तक चलाने के लिए उसमें नमक मिलाया जाता है, जो आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ाने और शरीर में वाटर रिटेंशन का कारण बन सकता है। जबकि घर के बने पनीर में सोडियम ना के बराबर होता है। यानी सेहत के लिए यह एकदम सुरक्षित विकल्प है।

पोषक तत्वों का खजाना: फिर से घर का पनीर आगे!
ताजा बना पनीर कैल्शियम और विटामिन्स से भरपूर होता है। दूसरी तरफ, पैक्ड पनीर को प्रोसेस और स्टोर करने की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कई पोषक तत्व कम हो जाते हैं। घर का पनीर बनाना ऐसा ही है जैसे फार्म से सीधा दूध लाना।

फैट की क्वालिटी: असली दूध की महक घर के पनीर में!
बाजार के कई पनीर ब्रांड्स लागत कम करने के चक्कर में दूध पाउडर या वनस्पति वसा मिला देते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता और पौष्टिकता दोनों प्रभावित होती है। जबकि घर के पनीर में आप जो दूध डालते हैं, उसी का शुद्ध फैट और प्रोटीन मिलता है।

पनीर

पचाने में आसान: ताजगी की जीत!
घर का बना पनीर नरम, ताजा और पचाने में बहुत हल्का होता है। वहीं, पैक्ड पनीर कई बार रबड़ जैसा और भारी लग सकता है, क्योंकि वह हफ्तों तक शेल्फ पर पड़ा रहता है। ताजे पनीर की बात ही कुछ और है!

निष्कर्ष: तो अगली बार जब भी पनीर की क्रेविंग हो, थोड़ा एक्स्ट्रा समय निकालकर घर पर ही पनीर बनाने की कोशिश करें। यह न सिर्फ सेहत के लिए बेहतर है, बल्कि इसके स्वाद और ताजगी के आगे बाजार का पनीर फीका पड़ जाएगा। हैप्पी कुकिंग

3 महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQs)

क्या मार्केट वाला पैकेटबंद पनीर पूरी तरह से अस्वास्थ्यकर है?

बिल्कुल नहीं! ऐसा कहना तो पनीर के साथ अन्याय होगा। पैकेट वाला पनीर भी प्रोटीन और कैल्शियम का एक स्रोत है, खासकर जब आपके पास समय कम हो। हालाँकि, घर का बना पनीर बिना किसी अतिरिक्त नमक, प्रिजर्वेटिव या मिलावट के एक शुद्ध और साफ-सुथरा विकल्प है। यह ऐसा ही है जैसे ताज़ा पका हुआ खाना बनाम डिब्बाबंद खाना – दोनों ही भूख मिटाते हैं, लेकिन ताज़े की बात ही कुछ और होती है।

क्या घर पर बना पनीर ज़्यादा दिनों तक चल सकता है?

यहाँ थोड़ी सी बात समझनी जरूरी है। घर का बना पनीर बिल्कुल ताज़ा और बिना किसी केमिकल के होता है, इसलिए यह पैकेट वाले पनीर की तुलना में कम समय तक ही तरोताजा रहता है। इसे आप फ्रिज में केवल 2-3 दिनों तक ही सही तरीके से स्टोर कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, प्रिजर्वेटिव्स की वजह से पैकेट वाला पनीर हफ्तों तक चल जाता है। तो, अगर आपको ताज़गी और पोषण चाहिए, तो घर का पनीर बेहतर है। अगर लंबी सेल्फ-लाइफ चाहिए, तो पैकेट वाला, लेकिन उसकी कीमत (नमक और केमिकल्स के रूप में) चुकानी पड़ सकती है।


क्या घर के बने पनीर का स्वाद बाजार वाले पनीर जैसा हो सकता है?

इस सवाल का जवाब तो आपकी रसोई की कला पर निर्भर करता है! विशेषज्ञों की मानें तो घर का बना पनीर अक्सर ज्यादा मुलायम और हल्के स्वाद वाला होता है, क्योंकि इसमें कोई एक्स्ट्रा नमक या स्टेबलाइजर नहीं होते। बाजार का पनीर थोड़ा भारी और नमकीन लग सकता है। असल में, घर का बना पनीर आपके व्यक्तिगत स्वाद के हिसाब से बनाया जा सकता है – चाहे आप उसे ज्यादा खट्टा पसंद करें या कम। तो, स्वाद की बात हो तो होममेड पनीर की जीत तय है, बशर्ते आपने उसे बनाने की कला सीख ली हो!

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